जन्म एक सुंदर पल
- जीवन जन्म के समय का सुन्दर और ऐतिहासिक पल हैजिसे भुला दिया गया,जन्मदिन मनाने में,चकाचौध ,दिखावे और उपहारों की अदला बदली (गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट )में। मां की प्रसवपीड़ा के साथ मां बनने की खुशी को याद करने और माँ को नमन करने का दिन होता है जन्म दिन। मां की ममतामयी गोद और आँचल के साए में उसके दिल से लगातार निकलते आशीर्वाद को शायद अर्थ हीन समझा जाने लगा है।ऐसा क्यों।
*कोरोना के कारण*
ReplyDeleteपृथ्वी पर कमोबेस हर आदमी ने प्रकृति और मानवता को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भीषण नुकसान पहुंचाया है जिसमें उसके अहम और स्वार्थ की बहुत बड़ी भूमिका रही है। कोरोना के माध्यम से आदमी - वर्ग को यह हल्की-सी चेतावनी है कि चेत जाओ और प्रकृति से खिलवाड़ करना बंद कर दो।
समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों और देशों में भूकंप, प्रदूषण के प्रभाव से तरह-तरह के रोगों, विभिन्न जान-लेवा बीमारियों से आदमी को समझ नहीं आई और वह अंध -भौतिकवाद की ओर भागता रहा है। (फिलहाल तो कोरोना के डर के मारे घर में बंद पड़ा है। )आदमी ने स्वार्थऔर निर्दयता के वशीभूत होकर पेड़ पौधों और जंगली जानवरों के रहने के स्थान - वनों और जंगलों को बेरहमी से काट डाला।जब जंगली जानवरों के रहने की जगह उनसे छीन ली गई तो जंगली जानवर गांवों और शहरों में घूमने लगे। ये बेजुबान यह संकेत कर रहे हैं कि आदमी वर्ग अब सुधर जाए और उंसके रहने स्थान जंगलों तथा वनों को बरबाद न करे।
झूठ,फरेब,बेईमानी,दुर्व्यवहार,नारी के प्रति अनाचार, अत्याचार, बच्चों और बुजर्गों के प्रति अन्याय जैसे पापों के भार से दुखी पृथ्वी पर से नाव धर्म लगभग समाप्त हो चुका है।कहीं-कहीं कुछ बचा है तो उसी के बल पर पृथ्वी बड़ी अंगड़ाई नहीं ले रही है। अब उम्मीद है, विश्वव्यापी इस बीमारी के प्रकोप से आदमी की समझ में कुछ आ जाए वरना कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ेगा ।