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जन्म एक सुंदर पल

जीवन जन्म के समय का सुन्दर और ऐतिहासिक पल हैजिसे भुला दिया गया,जन्मदिन मनाने में,चकाचौध ,दिखावे और उपहारों की अदला बदली (गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट )में। मां की प्रसवपीड़ा के साथ  मां बनने की खुशी को  याद करने और माँ को नमन करने का दिन होता है जन्म दिन। मां की ममतामयी गोद और आँचल के साए में उसके दिल से लगातार निकलते आशीर्वाद को शायद अर्थ हीन समझा जाने लगा  है।ऐसा क्यों।

नागरिक - कर्तव्य और निर्वाह

मैं भारत देश का नागरिक होने का दावा करता हूँ ,और वास्तव में हूँ भी।परंतु नागरिक के रूप में देश,समाज और राष्ट्र के लिए मेरे जो कर्तव्य हैं,उनके प्रति मेरी जागरूकता और निष्ठापूर्वक उन कर्तव्यों के तहत कर्म करना मेरी प्राथमिकता है जो मेरे घर,परिवार, समाज और कार्यस्थल से लेकर भारत के सभी नागरिकों के प्रति सकारात्मक सोच के कारण मुझे सही मायने में नागरिक होने का अहसास करवाती है ।

परिवार

*अनुशासन* मां है तो भावुकता है,दुलार है। पिता है तो अनुशासन है,संरक्षण है। भाई है तो अपनापन है,मन मंदिर है बहिन है तो रूठना-मनाना भी है। बेटा है तो सहारे की लाठी है,गौरव है। बेटी है तो तपती गर्मी में ठंडी छांव है। बहू है तो घर की लक्ष्मी है, मर्यादा है। पोता है तो लौटता बचपन है,खेल का साथी है। पोती है तो फूलों का आंगन और जिद्दी खिलौना है। यह सब है,तो अनुशासन है, प्रेम की बहार है। भावुकता और अनुशासन बिन जीवन अधूरा है। मेरी कविता, मेरी भावना ,मन का आइना। पुष्पेंद्र कुमार शर्मा

तुम समझ में बड़े हो।

धीरे-धीरे समझ आ रही है तुम्हारी बात बोना हूं मैं, समझ के मामले में,  तुम से। तुम बड़े हो समझ में , परिपक्वता में, मजबूत हो इरादों में सच है,  मजबूरी में  बंधे हैं,बंधनों में। कर्तव्य और अधिकार की दुहाई। और जकड़े हैं , डर से डरे, स्वार्थ में लिपटे, अकथ  सपना है यह अकथ दुनिया।