परिवार
*अनुशासन*
मां है तो भावुकता है,दुलार है।
पिता है तो अनुशासन है,संरक्षण है।
भाई है तो अपनापन है,मन मंदिर है
बहिन है तो रूठना-मनाना भी है।
बेटा है तो सहारे की लाठी है,गौरव है।
बेटी है तो तपती गर्मी में ठंडी छांव है।
बहू है तो घर की लक्ष्मी है, मर्यादा है।
पोता है तो लौटता बचपन है,खेल का साथी है।
पोती है तो फूलों का आंगन और जिद्दी खिलौना है।
यह सब है,तो अनुशासन है, प्रेम की बहार है।
भावुकता और अनुशासन बिन जीवन अधूरा है।
मेरी कविता, मेरी भावना ,मन का आइना।
पुष्पेंद्र कुमार शर्मा
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