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तुम समझ में बड़े हो।

धीरे-धीरे समझ आ रही है तुम्हारी बात बोना हूं मैं, समझ के मामले में,  तुम से। तुम बड़े हो समझ में , परिपक्वता में, मजबूत हो इरादों में सच है,  मजबूरी में  बंधे हैं,बंधनों में। कर्तव्य और अधिकार की दुहाई। और जकड़े हैं , डर से डरे, स्वार्थ में लिपटे, अकथ  सपना है यह अकथ दुनिया।