तुम समझ में बड़े हो।

धीरे-धीरे समझ आ रही है
तुम्हारी बात
बोना हूं मैं,
समझ के मामले में,
 तुम से।
तुम बड़े हो समझ में ,
परिपक्वता में,
मजबूत हो इरादों में
सच है, 
मजबूरी में  बंधे हैं,बंधनों में।
कर्तव्य और अधिकार की दुहाई।
और जकड़े हैं , डर से डरे,
स्वार्थ में लिपटे,
अकथ  सपना है यह
अकथ दुनिया।

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